Entrepreneurship Development on Livestock Feed Formulations

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पाठ्यक्रम विवरण:

भारत में ग्रामीण आजीविका में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पशुपालन में प्रमुख चुनौती उच्च आहार लागत और असंतुलित पोषण है, जो वैज्ञानिक आहार निर्माण के प्रति जागरूकता की कमी के कारण होता है। संतुलित आहार पशुओं की वृद्धि, प्रजनन, दुग्ध उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और आहार दक्षता के लिए अत्यंत आवश्यक है। विशेष रूप से बुंदेलखंड एवं अन्य वर्षा आधारित क्षेत्रों में चारे की कमी, कम गुणवत्ता वाले फसल अवशेष और परिवर्तनीय आहार मूल्य पोषण संबंधी समस्याओं को और अधिक गंभीर बना देते हैं। अतः स्थानीय संसाधनों, अपारंपरिक चारा तत्वों और सटीक पोषण तकनीकों के उपयोग द्वारा आहार निर्माण में क्षमता विकास पशुधन उत्पादकता और लाभप्रदता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।

Livestock farming plays a critical role in the livelihood of rural households in India. One of the key challenges in animal husbandry is the high cost and imbalanced feeding practices due to limited awareness about scientific feed formulations. Balanced nutrition is crucial for optimizing growth, reproduction, and milk production, while minimizing disease incidence and improving feed efficiency. In Bundelkhand and other rainfed regions, fodder scarcity, poor-quality crop residues and fluctuating feed prices further aggravate nutritional challenges. 

Hence, capacity building in feed formulation using locally available resources, unconventional feed ingredients and precision nutrition techniques are essential to improve livestock productivity and profitability.

पाठ्यक्रम के लाभ

प्रतिभागियों को संतुलित व सटीक पशु आहार निर्माण की नवीनतम तकनीकों व सिद्धांतों की जानकारी प्राप्त होगी। न्यूनतम लागत में संतुलित आहार निर्माण से पशुपालकों की कुल उत्पादन लागत कम होगी, जिससे लाभ बढ़ेगा। पशु आहार निर्माण, बिक्री, सलाहकार सेवाएं एवं फीड यूनिट स्थापना जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पोषण परामर्श सेवाएं देकर आजीविका प्राप्त कर सकते हैं।

लक्ष्य:

  1. पशुओं के लिए संतुलित व वैज्ञानिक आहार निर्माण के सिद्धांतों की जानकारी देना
  2. कम लागत में अधिकतम उत्पादन हेतु न्यूनतम लागत आहार निर्माण सिखाना
  3. स्थानीय व अपारंपरिक आहार संसाधनों के समुचित उपयोग को बढ़ावा देना
  4. पशुपालकों, युवाओं और डेयरी-पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना
  5. पशु आहार निर्माण क्षेत्र में उद्यमिता के नए अवसरों की पहचान कराना

पाठ्यक्रम के अपेक्षित परिणाम:

प्रतिभागियों को संतुलित व सटीक पशु आहार निर्माण की नवीनतम तकनीकों व सिद्धांतों की जानकारी प्राप्त होगी। न्यूनतम लागत में संतुलित आहार निर्माण से पशुपालकों की कुल उत्पादन लागत कम होगी, जिससे लाभ बढ़ेगा। पशु आहार निर्माण, बिक्री, सलाहकार सेवाएं एवं फीड यूनिट स्थापना जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पोषण परामर्श सेवाएं देकर आजीविका प्राप्त कर सकते हैं।

पाठ्यक्रम की रूपरेखा:

कक्षाएं सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार: 01 व्याख्यान और 02 प्रायोगिक कक्षाएं प्रतिदिन
पाठ्यक्रम की अवधि: 15 दिन

योग्यता: 10वीं उत्तीर्ण
पंजीकरण शुल्क:  सामान्य/अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य @200/- तथा एसस एवं एसटी @100/-
पाठ्यक्रम शुल्क: ₹1500/- प्रति प्रतिभागी

व्याख्यान तथा प्रायोगिक प्रदर्शन:

  • संतुलित आहार का महत्व
  • पशुओं की पोषण आवश्यकताएँ (गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गी)
  • चारे एवं आहार का वर्गीकरण
  • अपारंपरिक आहार संसाधनों का उपयोग
  • राशन निर्माण निर्माण के सिद्धांत व सामान्य अंगूठा नियम
  • BIS मानकों के अनुसार चारा विश्लेषण
  • न्यूनतम लागत आहार निर्माण (मैनुअल व सॉफ्टवेयर)
  • भिन्न अवस्थाओं हेतु आहार (गर्भ, दुग्ध, वृद्धि)
  • साइलेज व हे निर्माण का प्रशिक्षण
  • आहार अनुपूरक, पूरक व नियमन
  • चारा मिलावट की पहचान व परीक्षण
  • फीड यूनिट / डेयरी / पोल्ट्री फॉर्म भ्रमण
  • आहार व्यवसाय में उद्यमिता के अवसर
  • मोबाइल ऐप्स व सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उपकरण 
  • मूल्यांकन, फीडबैक व प्रमाण-पत्र वितरण

पाठ्यक्रम निदेशक

नामपद का नामईमेलपता
डॉ. प्रमोद कुमार सोनी,सहायक प्राध्यापक, पशु पोषण, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय[email protected] (8878180416)रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, दतिया (म.प्र.)

पाठ्यक्रम समन्वयक

नामपद का नामईमेलपता
डॉ. दीपक उपाध्याय,सह प्राध्यापक, पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन,  पशु  चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. सी. एस. पाटिलसह प्राध्यापक, पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन,  पशु  चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, [email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. मनवेन्द्र सिंह,सहायक प्राध्यापक, पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन, पशु  चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, [email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. गौरव कुमार,सहायक प्राध्यापक, पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन, पशु  चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. दिव्यांशु सिंह तोमर,सहायक प्राध्यापक, पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन, पशु  चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)

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