व्यावसायिक डेयरी फार्मिंग (Commercial Dairy Farming)

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पाठ्यक्रम का विवरण:

व्यावसायिक डेयरी फार्मिंग पशुपालन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो दुग्ध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, पोषण, प्रजनन, और विपणन की आधुनिक तकनीकों पर आधारित है। यह पाठ्यक्रम डेयरी उद्यमिता की संपूर्ण समझ देने हेतु तैयार किया गया है, ताकि किसान और नवोदित उद्यमी डेयरी क्षेत्र में टिकाऊ, लाभकारी और वैज्ञानिक रूप से संगठित व्यवसाय चला सकें। पाठ्यक्रम में डेयरी फार्म की स्थापना, उच्च उत्पादक पशुओं का चयन, आहार प्रबंधन, आवास व्यवस्था, रोगों की रोकथाम, दुग्ध संग्रहण एवं प्रसंस्करण, और सरकारी योजनाओं की जानकारी शामिल है।

Commercial dairy farming is a vital sector of animal husbandry, focusing on modern techniques in milk production, animal health management, nutrition, reproduction, and marketing. This course is designed to provide a comprehensive understanding of dairy entrepreneurship, enabling farmers and aspiring entrepreneurs to run a sustainable, profitable, and scientifically managed dairy enterprise. The course includes planning and establishment of dairy farms, selection of high-yielding animals, nutritional management, housing systems, disease prevention, milk collection and processing, and awareness about relevant government schemes.

पाठ्यक्रम के लाभ

प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम वाणिज्यिक डेयरी फार्मिंग में किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होता है, क्योंकि यह उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से डेयरी व्यवसाय संचालित करने का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। इस प्रशिक्षण के दौरान किसान पशुओं की नस्ल चयन, संतुलित आहार, रोग प्रबंधन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, अभिलेख संधारण, और पशुपालन की नवीन तकनीकों के बारे में सीखते हैं। साथ ही, उन्हें व्यवसायिक योजना, विपणन रणनीति और वित्तीय प्रबंधन की भी जानकारी दी जाती है, जिससे वे डेयरी को एक लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित कर सकते हैं। यह पाठ्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देता है और किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होता है।

लक्ष्य:

  • किसानों और उद्यमियों को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना।
  • डेयरी फार्म की स्थापना और संचालन के लिए तकनीकी और प्रबंधन संबंधी दक्षता का विकास करना।
  • उच्च दुग्ध उत्पादन हेतु प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन की रणनीतियों को समझाना।
  • डेयरी उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुँचने की क्षमता विकसित करना।
  • सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता विकल्पों की जानकारी प्रदान करना।

पाठ्यक्रम के अपेक्षित परिणाम:

  • प्रतिभागी डेयरी फार्म की योजना, संचालन, और लाभप्रद प्रबंधन में सक्षम होंगे।
  • पशुपालक दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार लाकर बेहतर आय प्राप्त कर सकेंगे।
  • प्रशिक्षु पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन, और पोषण प्रबंधन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनाएंगे।
  • उद्यमी डेयरी व्यवसाय को सफलतापूर्वक शुरू करने और चलाने की योजना बना सकेंगे।

पाठ्यक्रम का शुभारम्भ:

  • दिनांक

पाठ्यक्रम की रूपरेखा:

कक्षाएं सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार: 01 व्याख्यान और 02 प्रायोगिक कक्षाएं प्रतिदिन
पाठ्यक्रम की अवधि: 15 दिन

  • डेयरी फार्म की योजना एवं ढाँचा
  • उन्नत नस्लों का चयन
  • चारा एवं संपूर्ण आहार प्रबंधन
  • स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तकनीक
  • कृत्रिम गर्भाधान एवं प्रजनन प्रबंधन
  • सामान्य रोगों की पहचान और नियंत्रण
  • दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन
  • पशुधन बीमा और सरकारी योजनाएं
  • लागत विश्लेषण और लाभ योजना

योग्यता:   10वीं पास
पंजीकरण शुल्क:   सामान्य/ओबीसी और अन्य @200/- तथा एससी एवं एसटी @100/-
पाठ्यक्रम शुल्क:   3000/-

पाठ्यक्रम निदेशक

नामपद का नामईमेलपता
डॉ. मानवेन्द्र सिंहसहायक प्राध्यापक, पशु आनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग , पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected](8960647646)रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)

पाठ्यक्रम संकाय:

नामपद का नामईमेलपता
डॉ. दीपक उपाध्यायसह प्राध्यापक, पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. सी. एस. पाटिलसह प्राध्यापक, पशु आनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग , पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. दिव्यांशु सिंह तोमरसहायक प्राध्यापक, पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. प्रमोद कुमार सोनीसहायक प्राध्यापक, पशु पोषण विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. गौरव कुमारसहायक प्राध्यापक, पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैवरसायन विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. आनंद कुमार सिंहसहायक प्राध्यापक, पशुचिकित्सा औषधिय विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)
डॉ. देश दीपकसहायक प्राध्यापक, पशुचिकित्सा औषधिय विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी[email protected]रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, नौनेर, दतिया परिसर (म.प्र.)

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Last Updated on: September 19th, 2025 | Visitors: 348318
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